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Islam Guru Nanak Talks to Shaikh Ibrahim

Discussion in 'Interfaith Dialogues' started by vipkolon, Apr 3, 2012.

  1. vipkolon

    vipkolon
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    Mar 30, 2012
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    It is said that this sloka was uttered by the holy tongue of Guru Sahib on a very special occasion. During one of his Udasi, he met Sufi Saint Shaikh Ibrahim (descendant in the lineage of Baba Shaikh Farid). During the conversation between them, Shaikh Ibrahim requested Guru Nanak to reveal him the secret of the real home of human being and the way to reach there.

    कहा जाता है कि गुरु साहिब ने यह श्लोक एक विशेष अवसर पर अपनी मुबारक जुबान से फरमाया था | अपनी एक उदासी के दौरान आपकी बाबा फरीद की गद्दी के सूफी फकीर शेख़ इब्राहीम से मुलाकात हुई | गुरु साहिब से गुफ्तगू में शेख़ इब्राहीम ने गुरु साहिबान के सामने गुजारिश की, कि हमारा असली घर कौन सा है और हम वहां कैसे पहुँच सकते हैं | गुरु साहिब ने उत्तर में अपने विचार इस शब्द में प्रकट किये हैं :

    घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥
    पंच सबद धुनिकार धुनि तह बाजै सबदु नीसाणु ॥
    दीप लोअ पाताल तह खंड मंडल हैरानु ॥
    तार घोर बाजिंत्र तह साचि तखति सुलतानु ॥
    सुखमन कै घरि रागु सुनि सुंनि मंडलि लिव लाइ ॥
    अकथ कथा बीचारीऐ मनसा मनहि समाइ ॥
    उलटि कमलु अम्रिति भरिआ इहु मनु कतहु न जाइ ॥
    अजपा जापु न वीसरै आदि जुगादि समाइ ॥
    सभि सखीआ पंचे मिले गुरमुखि निज घरि वासु ॥
    सबदु खोजि इहु घरु लहै नानकु ता का दासु ॥१॥ (SGGS 1291)

    ਘਰ ਮਹਿ ਘਰੁ ਦੇਖਾਇ ਦੇਇ ਸੋ ਸਤਿਗੁਰੁ ਪੁਰਖੁ ਸੁਜਾਣੁ ॥
    ਪੰਚ ਸਬਦ ਧੁਨਿਕਾਰ ਧੁਨਿ ਤਹ ਬਾਜੈ ਸਬਦੁ ਨੀਸਾਣੁ ॥
    ਦੀਪ ਲੋਅ ਪਾਤਾਲ ਤਹ ਖੰਡ ਮੰਡਲ ਹੈਰਾਨੁ ॥
    ਤਾਰ ਘੋਰ ਬਾਜਿੰਤ੍ਰ ਤਹ ਸਾਚਿ ਤਖਤਿ ਸੁਲਤਾਨੁ ॥
    ਸੁਖਮਨ ਕੈ ਘਰਿ ਰਾਗੁ ਸੁਨਿ ਸੁੰਨਿ ਮੰਡਲਿ ਲਿਵ ਲਾਇ ॥
    ਅਕਥ ਕਥਾ ਬੀਚਾਰੀਐ ਮਨਸਾ ਮਨਹਿ ਸਮਾਇ ॥
    ਉਲਟਿ ਕਮਲੁ ਅੰਮ੍ਰਿਤਿ ਭਰਿਆ ਇਹੁ ਮਨੁ ਕਤਹੁ ਨ ਜਾਇ ॥
    ਅਜਪਾ ਜਾਪੁ ਨ ਵੀਸਰੈ ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਸਮਾਇ ॥
    ਸਭਿ ਸਖੀਆ ਪੰਚੇ ਮਿਲੇ ਗੁਰਮੁਖਿ ਨਿਜ ਘਰਿ ਵਾਸੁ ॥
    ਸਬਦੁ ਖੋਜਿ ਇਹੁ ਘਰੁ ਲਹੈ ਨਾਨਕੁ ਤਾ ਕਾ ਦਾਸੁ ॥੧॥


    The True Guru is the All-knowing Primal Being; He shows us our true home within the home of the self. The Panch Shabad, the Five Primal Sounds, resonate and resound within; the insignia of the Shabad is revealed there, vibrating gloriously. Worlds and realms, nether regions, solar systems and galaxies are wondrously revealed. The strings and the harps vibrate and resound; the true throne of the Lord is there. Listen to the music of the home of the heart - sukhmani, peace of mind. Lovingly tune in to His state of celestial ecstasy. Contemplate the Unspoken Speech, and the desires of the mind are dissolved. The heart-lotus is turned upside-down, and is filled with Ambrosial Nectar. This mind does not go out; it does not get distracted. It does not forget the Chant which is chanted without chanting; it is immersed in the Primal Lord God of the ages. All the sister-companions are blessed with the five virtues. The Gurmukhs dwell in the home of the self deep within. Nanak is the slave of that one who seeks the Shabad and finds this home within. ||1||

    गुरु नानक साहिब समझाते हैं कि सच्चा गुरु वह है जो जीव को जिस्म रूपी घर में अपना असली घर दिखा दे | मनुष्य शरीर वह आलमे सगीर और आलमे कबीर है, जिसके अद्भुत महल में दिन-रात पाँच अदभुत, हैरतंगेज़, रूहानी और लतीफ़ शब्द (बांगे आसमानी या निदाए सुल्तानी ) बज़ रहे हैं | इसमें न केवल वे अनन्त खण्ड-ब्रह्माण्ड ही समाये हुए हैं, जिनकी विशालता बुद्धि को चक्र देती है, बल्कि इसमें अनहद शब्द का इलाही राग भी गिन्ज़ रहा है | इसके अन्दर ही सबसे ऊँचे मुकाम (सचखंड) पर वह कुल मालिक परमात्मा सुल्तानी शान से अपने तख़्त पर विराजमान है और वहाँ शब्द की गंभीर और प्रबल धुन गूँज रही है |

    इस सच्चे घर को जानेवाला मार्ग सुखमना और सुन्न मण्डल में से होकर गुज़रता है | सुखमना इंगला और पिंगला के बीच की नाड़ी है जिसे शाहरग भी कहते हैं | सुखमना में शब्द धुन सुनने से सुन्न-मण्डल (पारब्रह्म) में लिव लग जायेगी अर्थात पारब्रह्म का रास्ता खुल जाएगा | अपनी अन्तिम रूहानी मंजिल पर पहुँच कर आत्मा शब्द-रूप हो जाती है और इसको पूर्ण शान्ति और आनन्द की सहज अवस्था प्राप्त हो जाती है | वहाँ पहुँच कर मन की सभी इच्छाओं का अन्त हो जाता है और उसको बाहरी संसार की और जाने की तृष्णा समाप्त हो जाती है | ह्रदय-कमल सीधा हो जाता है | यह शब्द और नाम के अमृत से भर जाता है, जिससे मन निश्चल हो जाता है | गुरु साहब बिना बजाये बज रहे अनहद शब्द को अजपा जाप बोल रहे हैं | इससे जुड़कर जीव सृष्टि के आदि उस प्रभु में समा जाता है | सतगुरु की सहायता से इस निज-घर में वास मिल जाता है | और वहाँ कई गुरुमुख आत्माओं से मिलाप होता है | फिर आत्मा सदा के लिए परमपिता परमात्मा में समा जाती है | जो कोई सतगुरु द्वारा शब्द को खोजकर इस घर में पहुँच जाये, वह धन्य है | उसका इस जन्म में आना मुबारक है और नानक उसका दास है | गुरु नानक को तो क्या दास होना है, वह तो हमें कुल मालिक का रूप होकर भी दीनता और आज़िज़ी का पाठ पढ़ा रहे हैं |
     
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